शाम के सात बजे थे।
बारिश थम चुकी थी, लेकिन सड़कों पर नमी अभी बाकी थी।
आरव हर रोज़ की तरह उसी बस स्टॉप पर खड़ा था—
हाथ में कॉफ़ी, आँखों में थकान, और दिल में कोई नाम…
जिसे वो कभी ज़ोर से नहीं बोल पाया।
तभी उसे दिखी अनाया।
सफ़ेद दुपट्टा, भीगे बाल, और आँखों में एक अजीब सी खामोशी।
वो पहली बार नहीं थी जब आरव ने उसे देखा था।
पिछले छह महीनों से, वो दोनों उसी बस का इंतज़ार करते थे…
बिना एक-दूसरे से बात किए।
बस आती,
दोनों बैठते,
और खामोशी उनके बीच बैठी रहती।
लेकिन उस दिन कुछ अलग था।
अनाया ने अचानक पूछा—
“अगर किसी से बहुत प्यार हो जाए…
तो क्या उसे बता देना चाहिए?”
आरव चौंक गया।
पहली बार, खामोशी टूटी थी।
वो मुस्कुराया, और बोला—
“अगर वो प्यार सच्चा हो…
तो देर करना गुनाह है।”
अनाया ने खिड़की से बाहर देखा।
आँखें नम थीं।
“कुछ प्यार… मुकम्मल नहीं होते,”
वो धीमे से बोली।
बस स्टॉप आया।
अनाया उतर गई।
आरव उसे रोकना चाहता था,
उससे कहना चाहता था कि
वो वही प्यार है…
जो हर रोज़ उसके साथ सफ़र करता है।
लेकिन शब्द…
हमेशा की तरह, हार गए।
अगले दिन,
बस आई…
आरव आया…
लेकिन अनाया नहीं।
दिन बीते।
हफ्ते गुज़रे।
फिर एक दिन,
बस स्टॉप पर एक ख़त पड़ा था।
“कुछ प्यार कहे नहीं जाते,
लेकिन ज़िंदगी भर साथ चलते हैं।
— अनाया”
आरव मुस्कुराया।
आँखें नम थीं।
वो जान गया था—
प्यार कभी अधूरा नहीं होता…
बस कुछ कहानियाँ मुलाक़ात तक नहीं पहुँच पातीं।
💛 गुरुकृपा

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