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Tuesday, 6 January 2026

हर 5 तारीख को जो बैठा रहता है

 



रेलवे स्टेशन पर एक नियम था
प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर हर महीने की 5 तारीख को कोई बैठता नहीं।

न बोर्ड पर लिखा था,
न अनाउंसमेंट में आता था।
फिर भी पुराने कर्मचारी जानते थे।

हर महीने की 5 तारीख दोपहर 1:15 बजे,
एक आदमी वहाँ बैठा मिलता था।

वह ट्रेन नहीं पकड़ता।
वह किसी को देखता भी नहीं।
बस सामने पटरियों को ऐसे घूरता
जैसे किसी याद को देख रहा हो।

उस दिन नया कर्मचारी, निखिल, ड्यूटी पर था।
उसे नियमों के बारे में कुछ नहीं बताया गया था।

उसने देखा
एक आदमी बेंच पर बैठा है।
कपड़े साधारण।
चेहरा ऐसा
जैसे बहुत देर तक रो चुका हो।

निखिल ने कहा,
“यहाँ बैठना मना है।”

आदमी ने सिर उठाया।
उसकी आँखें अजीब थीं
डरी हुई नहीं,
थकी हुई।

“आज कौन-सी तारीख है?”
उसने पूछा।

निखिल चौंका।
“मतलब?”

आदमी बोला,
“पहली… या पांचवीं?”

निखिल को गुस्सा आया।
“चलिये यहाँ से।”

आदमी खड़ा हुआ।
चलते-चलते बोला
“अगर आज पहला है
तो तुम मुझे भगा दोगे।
अगर पांचवी है
तो मेरी जगह तुम बैठोगे।”

शाम तक निखिल को वह बात याद आती रही।
रात को उसने स्टेशन का पुराना रजिस्टर खोला।

हर महीने की 5 तारीख की एंट्री एक-सी थी—

1:15 PM -- प्लेटफॉर्म 4
एक व्यक्ति दिखा
कुछ देर बाद बेहोश

नाम हर बार अलग था।
पर आख़िरी लाइन हमेशा वही

“शाम तक व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी।”

अचानक निखिल को एहसास हुआ
किसी भी पेज पर
आज की तारीख़ नहीं थी।
घड़ी देखी
1:12 PM।

उसे पसीना आने लगा।
वह भागता हुआ प्लेटफॉर्म 4 पर पहुँचा।

वही बेंच।
वही सन्नाटा।

और बेंच पर
कोई नहीं बैठा था।

सिर्फ एक पहचान पत्र पड़ा था।

उस पर नाम लिखा था
निखिल।

पीछे से किसी ने पूछा,
“आज कौन सी  तारीख है है?”

निखिल ने पलटकर देखा।

वही आदमी खड़ा था।
अब उसकी आँखों में थकान नहीं थी।
अब वहाँ
राहत थी।

और निखिल
धीरे-धीरे
बेंच पर बैठ गया।

ठीक 1:15 बजे।
और रजिस्टर में आज की तारीख अपडेट हो गई।

                   -- गुरुकृपा --

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