Delhi में रहने वाली 20 साल की काव्या बहुत समझदार मानी जाती थी।
ना ज्यादा friends, ना unnecessary outings।
उसका ज़्यादातर समय पढ़ाई और phone पर बीतता था।
उसका Instagram private था।
WhatsApp DP सिर्फ contacts को दिखती थी।
उसे लगता था — “मैं safe हूँ।”
एक रात 12:18 AM
उसके WhatsApp पर एक unknown number से message आया —
“सो गई क्या?”
काव्या ने reply नहीं किया।
दो मिनट बाद फिर message आया —
“Window बंद कर लो… बाहर ठंड है।”
काव्या का दिल धड़क उठा।
उसका कमरा तीसरी मंज़िल पर था।
Window आधी खुली थी।
उसने तुरंत उठकर खिड़की बंद की।
हाथ काँप रहे थे।
उसने number block कर दिया।
लेकिन तुरंत screen पर दिखा —
Last Seen: Typing…
Block करने के बाद भी।
अब डर सीधा सीने में उतर चुका था।
Phone फिर vibrate हुआ —
इस बार Telegram पर।
“Block karogi toh platform badal lunga.”
काव्या रोने लगी।
वो भागकर माँ के कमरे में गई।
माँ ने समझाया —
“कोई prank होगा।”
अगली सुबह police complaint दर्ज हुई।
Cyber team ने trace किया।
Location आया —
उसी building का WiFi।
सबको shock लगा।
Building में 12 flats थे।
Police ने सबका phone check किया।
कुछ नहीं मिला।
Case ठंडा पड़ने लगा।
लेकिन काव्या का डर नहीं गया।
तीसरी रात…
Phone silent था।
लेकिन screen अपने आप on हुई।
WhatsApp खुला।
Status section open हुआ।
उसकी खुद की profile पर नया status लगा हुआ था —
“मैं ठीक नहीं हूँ।”
Time stamp — 2:03 AM
जबकि वो सो रही थी।
अब माँ को भी यकीन हो गया —
ये मज़ाक नहीं था।
Police फिर आई।
इस बार building ke CCTV detail में देखे गए।
Footage में रात 2:01 AM पर
एक shadow सीढ़ियों से ऊपर जाती दिखी।
Camera angle clear नहीं था।
लेकिन…
वो shadow काव्या के flat में enter नहीं हुई।
वो सामने वाले flat में गई।
वहाँ कौन रहता था?
एक शांत, 45 साल का अंकल —
जो हमेशा balcony से नीचे झाँकते रहते थे।
Police ने जब उनका laptop check किया…
तो उसमें building के कई flats के WiFi passwords saved थे।
उन्होंने common router hack करके
कई लोगों के phones access किए थे।
काव्या का भी।
उन्होंने कबूल किया —
“मैं सिर्फ देखता था…
कोई नुकसान नहीं करना चाहता था…”
लेकिन psychological damage हो चुका था।
आज भी काव्या का phone जब “Last Seen: Typing…” दिखाता है…
तो उसका दिल धड़क उठता है।
क्योंकि उसे पता है —
खतरा हमेशा बाहर नहीं होता…
कभी-कभी वो दीवार के उस पार रहता है।

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