यह कहानी है एक साधारण सी कॉलोनी की, जहाँ सब लोग अपने-अपने काम में इतने व्यस्त थे कि किसी को किसी से मतलब ही नहीं था।
उसी कॉलोनी में रहती थी सिया, एक 12 साल की समझदार और संवेदनशील लड़की। सिया रोज़ स्कूल से लौटते समय देखती कि पार्क में कूड़ा फैला रहता है, बच्चे मोबाइल में लगे रहते हैं और बड़े लोग आपस में बात भी नहीं करते।
एक दिन उसने सोचा — “अगर हम ही बदलाव की शुरुआत नहीं करेंगे, तो कौन करेगा?”
अगले रविवार सिया ने अपने कुछ दोस्तों को बुलाया। सबने मिलकर पार्क की सफाई शुरू की। शुरू-शुरू में लोग उन्हें देख कर मुस्कुरा रहे थे, कुछ तो कह रहे थे, “इससे क्या होगा?”
लेकिन बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने कूड़ा उठाया, पौधे लगाए और एक बोर्ड लगाया —
“यह हमारा पार्क है, इसे साफ रखना हमारी जिम्मेदारी है।”
धीरे-धीरे कॉलोनी के बड़े लोग भी जुड़ने लगे। किसी ने पानी की व्यवस्था की, किसी ने नए पौधे दिए, तो किसी ने बच्चों की तारीफ की।
कुछ ही हफ्तों में वही गंदा पार्क हरा-भरा और साफ हो गया। अब वहाँ शाम को बच्चे खेलते, बुज़ुर्ग टहलते और लोग एक-दूसरे से मुस्कुराकर मिलते।
एक दिन कॉलोनी की मीटिंग में सबने सिया की सराहना की। लेकिन सिया ने कहा —
“मैंने कुछ नहीं किया, बस शुरुआत की थी। बदलाव हम सबने मिलकर किया है।”
उस दिन सबको समझ आया कि समाज बदलने के लिए बड़ी ताकत नहीं, बस एक छोटी सी पहल और सच्ची नीयत चाहिए।
✨ संदेश
अगर हम अपने आसपास की छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ निभाने लगें, तो समाज खुद-ब-खुद बेहतर बन सकता है।
💛 गुरुकृपा

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