Friday, 12 December 2025

“सुपरहीरो नहीं, सुपर दिमाग़”


नमस्कार दोस्तों, 

       आज मैं एक ऐसी कहानी आप सब के आगे लेकर आई हू जो  है तो साधारण सी। लेकिन है प्रभावशाली। मेरा तो यही मानना है आगे आप पढ़ कर देखे। की आप क्या महसूस करते है। तो आते है अपनी कहानी पर.....


        एक बार की बात है लक्ष्मी काम से बाहर गयी। वह एक ग्रहणी है और उसकी आयु 50 वर्ष है। वह बाज़ार से निकल कर मेट्रो स्टेशन जा रही थी। तभी उसने महसूस किया की उसके बगल में एक 22, 23 साल की लड़की भी चल रही थी। लेकिन वह बाहुत ही  uncomfortable थी। दिखने में अच्छी घर की साधारण सी लड़की लग रही थी। वहां तो लक्ष्मी  ने ध्यान नहीं दिया। और उसने मेट्रो स्टेशन में entry ले ली। वह भी उसके साथ ही मेट्रो स्टेशन में प्रवेश कर गयी।

     अब भी वह uncomfortable लग रही थी उसे थोड़ा अजीब लगा उसने इधर-उधर नजर दौड़ा कर देखा तो देखा 2, 3 मंचले उसे बाज़ार से ही परेशान कर रहे थे। अब सारा मामला उसे समझ आ गया। लेकिन वह यह नहीं कभी समझ पाई की ऐसे में कोई मदद के लिए सामने क्यों नहीं आता। खैर उसने भी कुछ समय तक observe किया। और उसे सच में  लगा की वह बहुत परेशान है और वो उसे लगातार परेशान किये जा रहे है।

     लक्ष्मी  ने बहुत सोचा कि वह उसकी मदद कैसे करें। लोगों को जमा करे और उनकी पिटाई कराए, फिर ख्याल आया की कल को वो उसे मिल गये तो उसकी मदद कौन करेगा। फिर यह भी ख्याल आया कि कल को उसकी बहन या बेटी को कभी यह परेशानी हुई तो उसकी भी कोई मदद नहीं करेगा। यह ख्याल मन मे  आते हि लक्ष्मी ने मदद करने की सोच ली।

    अब वह सोच रही थी कि कैसे मदद की जाए वो कोई इतनी फुर्तीली नहीं थी की उनसे लड़ने लग जाएं। फिर उसने सोचा कि हर बार लड़ना जरूरी नहीं है, दिमाग़ भी लगाया जा सकता है। क्योंकि हर लड़ाई बल से नहीं दिमाग़ से भी जीती जा सकती है। बस उसने तरीका सोच लिया।

     उसने चारो ओर फिर देखा वही नज़ारा था। उसने हिम्मत इकट्ठी की और जोर से उस लड़की की ओर चिल्लाती हुई गयी और कहने लगी...

    "अरे बेटा यहाँ क्या कर रही हो। क्या बात है बहुत दिन हो गये , चाची से मिलने नहीं आई, क्या चाची की याद नहीं आती। मैं तुझ से बहुत नाराज़ हू। बस वो बे मतलब उस से नाराजगी, दिखाती रही और गुस्सा होती रही। इस बीच उसने उस लड़की को आँख भी मार दी थी। उसे भी समझ आ गया था तभी वो भी साथ देने लगी। उनके इस धमाकेदार मिलन में वह इतना busy हो गये की उन्हें ध्यान नहीं रहा कि वह उनकी तेज़ तेज़ आवाज़ सुन कर और यह जानकर कि वह अकेली नहीं है वो लड़के कबके वहां से चले गये।

   जब उस लड़की को लगा सब ठीक है उसने लक्ष्मी को बहुत - बहुत और बार - बार धन्यवाद किया और कहा की," अगर आज आप नहीं होते तो मेरे लिए बड़ा मुश्किल हो जाता। उन्होंने एक दूसरे का नाम पूछा थोड़ी देर बैठ कर बाते की, चाय पी और अपने-अपने रास्ते चल पड़े। अब उसके मन में यह तसल्ली थी कि वो अब सही थी।

       और दोस्तों यहां कहानी का अंत होता है। अब मैं आपसे एक बात पूछना चाहती हूं कि क्या आपने कभी याह situation face की है या नहीं। अगर आप भी करे तो मेरा मानना है कि आप को भी इन हालतों में मदद करनी चाहिए। कभी टाइम पूछने के बहाने, कभी रास्ता पूछने के बहाने, स्थिति को बदलने की कोशिश करनी चाहिए और अगर स्थिति अधिक खराब हो तो लोगों को साथ लेकर मदद करनी चाहिए। और हमेशा यह याद रखो कि आप सुपरहीरो नहीं हो लेकिन सबके पास सुपर दिमाग़ तो है उसका इस्तेमाल करें।

    आगे कहानी समाप्त होती है अपने विचार या ऐसा कोई अनुभव आपको भी हुआ हो तो जरूर Share कीजिएगा हमारे साथ।

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