Tuesday, 27 January 2026

जब प्यार स्वार्थी नहीं होता | एक भावनात्मक प्रेम कहानी

 


यह कहानी है। कुणाल और ज्योति की। दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों का स्कूल भी एक ही था। कुणाल ज्योति से 2 साल बड़ा था। एक साथ 12 साल एक ही स्कूल में पढ़ना। बचपन से साथ स्कूल आना जाना हो। तो आपस मैं प्यार हो जाने के chances भी बहुत ज्यादा होते है।


     और हुआ भी ऐसा ही। पहली class की दोस्ती बारहवीं class तक आते आते प्यार में बदल गई थी। और यह कोई निब्बा नीबी वाला प्यार नहीं था। दोनों ने अपने भविष्य के लिए काफी कुछ सोच रखा था। दोनों स्कूल के अलावा कही इधर उधर नहीं मिला करते थे। 


     दोनों ने बारहवीं class पास की। और एक ही कॉलेज में admission लिया। अब दोनों काफी समय साथ बिताने लगे। और दोनों का प्यार और पक्का होने लगा।


     कॉलेज का आखिरी साल पूरा होने वाला था। और अब उनकी love story का turning point आने वाला था। दोनों ने कॉलेज पास किया। 


     अपनी अपनी योग्यता के अनुसार दोनों ने नौकरी भी ढूंढ ली। लेकिन ज्योति के घरवालों ने उसे नौकरी करने से मना कर दिया।

     उसके ताया जी बोले- हमारे घर में लड़कियां नौकरी नहीं करती। घर पर रहती हैं। घर संभालती है।


     उस समय दोनों को पहली बार लगा। कि वो अपनी बात कैसे करेंगे। ज्योति के घरवाले ज्यादा आधुनिक विचारधारा वाले लोग नहीं थे। वो जरा रूढ़िवादी थे। जबकि कुणाल के घरवाले फिर भी आधुनिक विचारों के थे।


     उस दिन ज्योति की जॉब का तो सपना टूटा ही, साथ ही शाम तक ऐसा कुछ हुआ। कि वो अंदर तक हिल गई। 

उस शाम उसकी बुआ घर आई। और ज्योति के लिए एक रिश्ता लेकर आई। आते ही बुआ बोली : भइया मैं अपनी ज्योति के लिए एक बहुत ही अच्छा रिश्ता लाई हूं। लड़का अपनी बिरादरी का है। और अच्छा कमाता भी है।


    बस क्या था। ये सुनकर ज्योति के घरवाले खुश हो गए। और लड़का देखने का time fix करने लगे। उस समय तो वह कुछ नहीं बोली, क्योंकि घर पर ताया, बुआ सब थे।

जब सब चले गए। तब उसने सोने से पहले सबके सामने बता दिया। कि वो कुणाल से प्यार करती है। और उस से ही शादी करेगी। 

  

    बस उसका इतना कहना था कि घर में गोला बारी चालू हो गई। उसके पिताजी बोले : ना तो वो हमारी बिरादरी का है, ना ही बराबरी का।


     इस पर ज्योति ने कहा: वाह। अब यह बात आपको याद आ रही है। जब बचपन से वो हमारे घर आता रहा हैं। आपके कितने मसले सुलझाए हैं उसने। जब भी मेरे लिए या किसी भी काम के लिए कुणाल की जरूरत होती थी। तब वो इस घर का बेटा होता था। लेकिन अब क्या हुआ है।


इतनी बात हुई थी कि ताया जी वापस आ गए। और उन्होंने सब सुन लिया।

     उन्हें देख साफ पता चल रहा था कि उन्हें कितना गुस्सा आ रहा था। लेकिन वो शांति से बोले : सुन बेटी चाहे तू कुछ भी बोल तेरी शादी वहां नहीं हो पाएगी। रही यह बात वो बचपन से यहां आता रहा है, आज तक मदद करता रहा है। तो इसका मतलब यह नहीं कि हम उस से तुम्हारी शादी करवा देंगे।

हां। अब आगे से उसका यहां आना, तेरा उस से मिलना सब बंद। समझ गई।


ज्योति के पापा से कहा कि कल के कल लड़का देखो और रिश्ता पक्का करो। अगर लड़का सही है तो।


    ज्योति गिड़गिड़ाने लगी। पर उसकी बात किसी ने नहीं सुनी।

रात को उसने फोन करके सब कुछ कुणाल को बता दिया। कुणाल भी हक्का बक्का रह गया। अब उन्होंने तय किया। कि कुणाल कल आ कर बात करेगा। 


अगली सुबह वह job पर जाने से पहले अपनी मां के साथ ज्योति के घर पहुंच गया।

     जैसे ही वो उनके घर में दाखिल हुए। अभी बैठे भी नहीं थे। कि उसके ताया जी, और उसके पापा हाथ जोड़कर खड़े हो गए। और कुणाल की मां से बोले: बहन जी। बिनती है आप से इनकी शादी की बात मत कीजिएगा। क्योंकि जो हो नहीं सकता। उसके बारे में बात करने का कोई फायदा नहीं। और कोई सेवा हो तो बताए।


कुणाल बोला: अंकल यह सब पुरानी बातें है। आज कोई भी इन बातों को नहीं मानता।

ताया जी बोले: बेटा हम भी 70 साल पुराने हैं। और हम मानते हैं।

कुणाल को गुस्सा आ गया। वो कुछ कहता ज्योति की मम्मी बोली: ऐसा है अब आप जा सकते हो।

कुणाल की मम्मी यह सुनकर खड़ी हुई और वापस आ गई।

घर आ कर कुणाल कुछ नहीं बोला और गुस्से में ऑफिस चला गया।

    उस रात कुणाल घर वापस नहीं आया। उसकी मां ने भी कई बार फोन try किया। पर उसने नहीं उठाया। रात के 2 बज गए। कुणाल की मां ने उसके सब दोस्तों के घर फोन घूमा डाला। पर कहीं से कुछ भी नहीं पता चला।


     तभी ढाई बजे के करीब दरवाजे पर बहुत जोर जोर से दस्तक होने लगी। जैसे ही उसने दरवाजा खोला।


   ज्योति के ताया जी, पिताजी, भाई एकदम गुस्से में भरे घर में घुस गए। और कुणाल को आवाज़ देने लगे। जब कुणाल नहीं मिला। तो उसकी मां से बोले: दोनों कहां है। कहां छुपाया है उन्हें। यह सुनकर उसको सारी बात का अंदाजा हो गया कि कुणाल और ज्योति भाग गए थे।

    कुणाल की मां बोली : मुझे नहीं पता। मुझे कुछ नहीं पता।

तब ज्योति के पिताजी बोले: देखो ऐसा है हमने पहले ही मना कर दिया था।


   अब दोनों ने मिलकर ये कदम उठाया हैं तो ठीक हैं। एक बात याद रखना। अगर हमारे हाथ यह दोनों लगे। तो हम ज्योति को जिंदा नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि हम सिर्फ अपनी बेटी को जानते है। और वो बचपन से हमारे घर के नियम जानती है। तब भी उसने ऐसा किया। तो गलती उसकी है। सजा भी उसी को मिलेगी।

इतने में कुणाल और ज्योति भी वहां आ पहुंचे। उन्होंने सारी बात सुन ली।

ज्योति के ताया बोले—

“अब फैसला तुम्हें ही करना है।

हम तो खुशी-खुशी इसे खत्म करके जेल चले जाएंगे।

सारी ज़िंदगी वहीं काट लेंगे।


तुम बताओ कुणाल,

क्या तुम्हें सही लगता है

तुम्हारे प्यार का जिंदा रहना

और कई ज़िंदगियों का बर्बाद हो जाना?


या फिर तुम्हारे प्यार का मर जाना,

ताकि किसी और की ज़िंदगी उजड़ने से बच जाए?”


कुणाल ज्योति से बहुत प्यार करता था।

वो पूरी ज़िंदगी उसके साथ रहना चाहता था।

लेकिन इतना खुदगर्ज नहीं था

कि अपने प्यार के लिए सबको जला दे।


उसने एक कदम पीछे हटकर

ज्योति को आगे कर दिया।

और कहा—

“मैं ज्योति से बेइंतहा प्यार करता हूँ।

उसे खोकर शायद मैं भी जिंदा न रह पाऊँ।


लेकिन मेरी माँ है… मेरी बहन है…

उनका इसमें कोई कसूर नहीं।

तो सज़ा वो क्यों भुगतें?”


फिर उसने ताया जी की तरफ देखा—


“कल को अगर मेरी बेटी होगी,

तो मैं उसे पूरी आज़ादी दूँगा

अपने लिए प्यार चुनने की।

बस वो इंसान ईमानदार हो,

और सच्चा प्यार करने वाला हो।


चाहे मैं तब 70 का होऊँ या 80 का।”


उसने ज्योति की तरफ देखा,

आँखें नम थीं—


“गलती हुई है…

पाप नहीं,

कि उसकी जान ले ली जाए।”


उसने ज्योति से माफ़ी माँगी

और सबको जाने को कहा।


इतने में ज्योति के ताया जी की आवाज़ आई—


“बेटा, हमें माफ़ कर दो।

तुम दोनों का प्यार स्वार्थी नहीं है।


जब तुम अपने प्यार,

अपनी माँ और बहन के लिए

इतनी बड़ी कुर्बानी दे सकते हो,

तो हमारी बिटिया को

कितना खुश रखोगे —

इसकी हमें चिंता नहीं।”


उन्होंने गहरी साँस ली—


“आज हम किसी को मारने आए थे…

इसलिए मारेंगे

 तो सही लेकिन 

अपने पुराने विचारों को।”

घर में पहली बार

हँसी गूँजी।


दो हफ्ते बाद

कुणाल और ज्योति की शादी हो गई।

💛 गुरुकृपा


No comments:

Post a Comment

Best Joggers for man

Combo of blanket in affordable price