यह कहानी सोच और समझ की गहराई को दिखाती है
रोज सुबह उठ कर morning walk पर पार्क जाना मेरा daily routine था। कभी - कभी शाम को भी घूमने निकल जाया करता था। पार्क जाना, वहां घूमना, बैठना मुझे बहुत अच्छा लगता था। और साथ ही एक चीज और वहां की मुझे बहुत अच्छी लगती थी। और वह थी वहां पार्क के साथ चाय की stall.
आप भी सोच रहे होंगे। कि चाय की stall में अच्छे लगने वाली क्या बात थी। वहां की चाय। तो मैं बताना चाहूंगा, सिर्फ चाय नहीं। वहां पर काम करने वाला वो बच्चा, जिसके पापा की वो stall थी। वो थी मेरी पसंद करने की असल वजह। पहले वो एक छोटी सी चाय की टपरी थी। लेकिन अपनी मेहनत और समझदारी से उस परिवार ने उसे एक छोटा सा breakfast stall बना दिया था। जी हां पूरा परिवार मिलकर काम करता था। माँ-बाप चीजें बनाते थे। और वो सारे पार्क और उसके आस - पास चाय और अन्य चीजें देने जाता था।
आप कहेंगे कि एक बच्चा अपने पढ़ने और खेलने की उम्र में काम कर रहा था। इसमें पसंद आने वाली क्या बात है।
तो रुकिए
सब्र कीजिए
बताता हूं ---
बात यह है कि वो बच्चा पढ़ने भी जाता था। और स्कूल के बाद अपने मां - बाप की मदद भी करता था। एक बार मैने उससे पूछा - बेटा आपको इन बच्चों को खेलते हुए देखकर खेलने का मन नहीं करता। और जैसे और बच्चे अपने माता - पिता से चीजों की जिद्द करते हैं। वैसे जिद्द करने का दिल नहीं करता।
उस दिन जो उस बच्चे ने बात कही वो मेरे दिल को अंदर तक छू गई थी।
उसने कहा - हां। करता है। और जब मन करता है। तब मैं भी इनके साथ खेल लेता हूं। और साथ ही में यह देखता हूं कि मेरे पापा और मम्मी कितनी मेहनत से मेरे लिए मेहनत करते है। मुझे पढ़ाने, और अच्छी जिंदगी देने के लिए कितना काम करते है।
और रही जिद्द की बात मेरे पास सब कुछ है जो मेरे लिए जरुरी है। अंकल एक छोटी सी बात जो आपने शायद नोटिस नहीं की होगी। कि पहले हम चाय कांच के गिलास में देते थे। और अब हम सब disposable use करते हैं। पता है क्यों मेरे पापा मुझे रात को सर्दियों में बर्तन धोते हुए देखते थे। और उन्हें यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। इसलिए उन्होंने यह सोचा कि पैसे थोड़े कम कमा लेंगे। लेकिन मुझे तकलीफ ना हो। और आज तक आपने भी देखा होगा कि मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं है।
और जब आपके मां - बाप आपके बिना बोले आपकी तकलीफ और जरूरत समझते हो तो जिद्द करने की कोई जरूरत नहीं होती।
उस बच्चे की यह बात सुनकर मेरे मन में एक ही बात आई कि - "समझदारी उम्र की मोहताज नहीं होती"
क्योंकि हमने ऐसे कई बच्चे और जवान लोग देखें है। जो हमेशा अपने मां - बाप से दुखी होते है और यह कहते हुए दिखते है कि उन्होंने उनके लिए क्या किया है।
ऐसे समय पर ऐसे समझदार बच्चे को देखकर मेरा मन बहुत खुश हो गया।
अब तो आप भी जान गए होंगे। मेरे उसी पार्क में जाने का राज।
आज भी मैं जब वहां जाता हूं। चाय भी जरूर पीता हूं। और थोड़ी देर उस बच्चे के साथ बैठकर बात भी जरूर करता हूं।

Nice words heart touching
ReplyDeleteGreat story
ReplyDeleteEmotional story❤️
ReplyDeleteWow❤️
ReplyDeleteGreat story ✍️
ReplyDeleteBest🫂
ReplyDeleteBahut ache mummy❤️
ReplyDeleteA wise story
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