इंस्पेक्टर राजदीप एक बहुत ही बहादुर, नेक और ईमानदार व्यक्ति थे। वो अपनी ड्यूटी को बहुत ही ईमानदारी से निभाते थे। और यही कारण था। कि बड़ा से बड़ा केस वो आसानी से सुलझा लेते थे।
एक बार की बात है कि city में एक murder हो गया। और याह केस भी राजदीप के पास आया। राजदीप ने जब वहां जाकर देखा तो पता चला कि एक लड़की का मर्डर हुआ था। और जो चश्मदीद थे। उन सब लोगों ने बताया था। कि उन सबने एक आदमी को उसके फ्लैट में कत्ल से पहले आखिरी बार देखा था।
मगर राजदीप ऐसा इंसान नहीं था कि वो कही सुनी बातों पर विश्वास कर ले। उसने जांच शुरू की। धीरे - धीरे सारी परतें खुलने लगी। पता चला कि जिस आदमी को आखिरी बार देखा गया था। वो एक बहुत बड़ा बिज़नेस मैन था। और जिसका कत्ल हुआ वो एक बहुत ही निडर repoter थी।
यह सब जानकर राजदीप काफी हद तक मामला समझ गया था। जांच शुरू हुई। सारे सबूत, सीसीटीवी कैमरे की फुटेज, सब इकट्ठा किए गए। और जांच करने पर पता लगा कि वो नकली दवाइयां बनाने का काम करता था। उसकी कुछ जरूरी जानकारी और फोटोज रिपोर्टर के पास थी। और वो उसे रोकना चाहता था।
सब सबूतों के होते हुए भी वो आदमी बच निकला। उस रिपोर्टर को इंसाफ नहीं मिला। क्योंकि उसने पैसे और ताकत के बल पर सारी चीजें बदल दी। और उस लड़की को ही दोषी साबित कर दिया। और खुद वो बाइज्जत बरी हो गया।
यह देखकर राजदीप को बहुत दुख हुआ। वो बहुत रोया। रोते - रोते वो कब सो गया। उसे पता ही नहीं चला। और जब उसकी सुबह आंख खुली तो उसे अपना शरीर बहुत हल्का महसूस हुआ।। इसके अलावा भी उसे बहुत कुछ अजीब लग रहा था। उसने ज्यादा सोचा नहीं और तैयार होने लगा काम के लिए।
लेकिन एक दिन ऐसा केस आया, जिसने राजदीप की आत्मा को झकझोर कर रख दिया।
एक पुराने बंद पड़े गोदाम में एक लाश मिली थी। जैसे ही राजदीप ने लाश को छुआ, उसे वही झटका लगा - मगर इस बार जो दृश्य सामने आया, उसने उसके कदम रोक दिए।
उसने देखा - वो खुद उस जगह खड़ा है। उसके हाथ खून से सने हुए हैं। सामने वही बड़ा बिज़नेस मैन पड़ा है, जिसे कभी कानून ने छोड़ दिया था। राजदीप घबरा गया। उसे समझ आ गया कि जो शक्ति उसे मिली है, वो इंसाफ दिखाने के साथ-साथ उसे उसका बोझ भी महसूस करवा रही है। उसे याद आया - रिपोर्टर की आंखों में छलकता डर, उसकी अधूरी लड़ाई, और उसका टूटा हुआ विश्वास।
राजदीप ने अपनी आंखें बंद कीं और मन ही मन कहा -
“मैं जज नहीं बन सकता, लेकिन इंसाफ का रास्ता जरूर बन सकता हूँ।” उसने अपने साथियों को बुलाया, सारे सबूत जुटाए, पुराने केस को दोबारा खुलवाया। इस बार सबूत इतने पुख्ता थे कि ताकत और पैसा भी हार गए। Business मैन को सज़ा मिली… देर से ही सही, लेकिन सच जीत गया।
उस दिन के बाद राजदीप ने एक फैसला लिया। वो अब लाश को छूकर मिली शक्ति का इस्तेमाल तभी करेगा, जब कानून के सारे रास्ते बंद हो जाएँ। क्योंकि उसे समझ आ गया थ। इंसाफ चमत्कार से नहीं, ज़िम्मेदारी से पूरा होता है। और उसी दिन पहली बार राजदीप को अपना शरीर फिर से हल्का नहीं, बल्कि शांत महसूस हुआ।

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