Sunday, 21 December 2025

पहली नज़र, दूसरी शुरुआत




      महेश का आज कॉलेज का पहला दिन था। सभी स्टूडेंट्स अपनी अपनी क्लासेस में जा रहे थे। कही कहीं हल्की फुल्की शरारतें भी चल रही थी। लेकिन सब control में था। महेश भी अपनी क्लास में जाकर बैठ गया। सभी स्टूडेंट्स नए थे। महेश का nature था वह जल्दी किसी से बात नहीं करता था। 

     क्लास धीरे धीरे भरने लगी थी लगभग सभी सीटें भर चुकी थी। सिर्फ महेश के साथ वाली छोड़कर। तभी उसने देखा एक बेहद खूबसूरत सी लड़की उसके बगल में आकर बैठ गई। जिसे देखकर महेश के तो होश ही उड़ गए। वो अपने आप को lucky समझने लगा कि वह उसके पास बैठी है।

     अब तो रोज महेश उसे देखने के लिए वो class attend करने लगा। बस सारे समय उसे देखता रहता। मन ही मन खुश होता रहता। याह सिलसिला काफी समय चला। लेकिन महेश की हिम्मत नहीं हुई उसका नाम पूछने की। 5 महीने बीत गए ऐसे ही चलता रहा।

    तभी एक दिन क्लास में एक अनाउसमेंट हुई कि एक Additional Subject दिया जा रहा है। और पता चला कि उसने भी वो subject ले लिया है। और उसकी क्लास बदल गई थी। और समय भी निकल गया था। ना ही अब वो subject ले सकता था। वह इसी उधेड़ बुन में लगा हुआ था कि उन students का नाम बोला जाने लगा जिनकी क्लास change होनी थी। महेश का दिल बैठ सा गया क्योंकि अब उसका भी नाम लिया जाना था। और सबसे पहले उसी का नाम लिया गया। Mrs. सविता, नाम तो पता नहीं था लेकिन यह भी नहीं पता था कि वो mrs. है। अभी तो उसका दिल सिर्फ बैठा था अब लगा कि वो 100 वी मंजिल से नीचे धड़ाम करके गिर गया। और background में जैसे गाना बजने लगा,"My heart is broken in many piece, some fallen here, some fallen there".

      अभी तक जिन गानों का वो मज़ाक उड़ाता था। वो सब उसे अपनी situation से मिलते जुलते लगे जैसे, "छन से टूटा कोई सपना, जग सुना सुना लागे". अब तो सचमुच महेश का कॉलेज और घर का जहां सुना सुना हो गया था। उसका मन भी नहीं करता था कॉलेज आने का। क्योंकि पहले तो बात करने की हिम्मत नहीं होती थी लेकिन अब बात करने को कुछ बचा ही नहीं था। और सबसे बड़ी हैरानी और मज़े की बात अब महेश ने ध्यान दिया कि वो मांग भी भर कर आती थी। पहले दिन जब वो महेश के पास बैठी थी तब नहीं भरी थी। बेचारा महेश।


  ऐसे ही 2, 3 महिने बीत गए, उदासी भरे। तभी उसकी क्लास में एक और सुंदर सी लड़की आई। जिसका अभी अभी admission हुआ था। प्रभु की लीला देखो वो पुराना काम पूरा करने के लिए महेश के पास ही आई। महेश की बांछे खिल गई, दिल गार्डन गार्डन हो गया। महेश ने सब कुछ छोड़ कर सबसे पहले उसका नाम, पूरा नाम पूछा, नाम के आगे मिस था और गहराई से उसकी मांग देखी जो कि भरी हुई नहीं थी। क्योंकि पहले इसी मांग की लाल लकीर ने उसकी प्रेम कहानी पर फुल स्टॉप 🛑 लगा दिया था। वह बहुत खुश हो गया। इस बार उसने ठान लिया की वो देर नहीं करेगा। और साथ ही अब फिज़ाओं में , ओर उसके दिल में यही गाना बज रहा था,"तुम जो आए जिंदगी में बात बन गई"।
      

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