Saturday, 22 February 2025

सदी के सबसे पवित्र विवाहोत्सव पर आप सबको सप्रेम निमंत्रण।


 नमस्कार दोस्तों,


   अगर यह देखने में कोई कठिनाई हो तो नीचे दिए  लिंक पर क्लिक करें।

https://youtube.com/shorts/uF67QSqrbBA?si=kHNfX0YzSLOCyOJJ

आएईगा जरूर 
धन्यवाद 

Saturday, 21 December 2024

व्यवहार (आखिरकार हर एक को बड़ा होना है।)

 



नमस्कार दोस्तों,

     आज मैं बात करूंगी एक ऐसे विषय पर जिस पर मेरे जो हम उम्र है वो काफी हद तक सहमत होंगे और जो हम से छोटे है वो शायद आज ना सहमत हो परंतु आगे जाकर जरूर सहमत हो जाऐंगे। और यह विषय है "व्यवहार

    अब आप सोचेंगे कि यह क्या विषय हुआ। तो मैं यह बताना चाहूंगी कि जनाब यह बहुत मजेदार विषय है। मैं जो भी लेख (Article) लिखती हूं। वो अधिकतर अपने अनुभवों के आधार पर लिखती हूं। और अगर आप में से कोई भी इस से असहमत हों, तो उसके विचार भी पूर्णतया सम्मानिय हैं। पर इस के बारे में कमेंट बॉक्स में बताईएगा जरूर।

     चलो अब  वापस आते हैं अपने विषय पर "व्यवहार" पर। आप लोगों ने कई बार स्कूलों, बाज़ारों, और कई जगहों पर यह नोटिस किया होगा कि जब माता-पिता बाहर कहीं पर भी अपने व्यवहार के अनुसार बात कर रहें होते हैं तो उनके बच्चे उन्हें चुप करवा रहे होते है या शर्मिंदगी महसूस कर रहे होते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई और अगर सुन लेगा या देख लेगा तो क्या होगा।

   इस चीज को मैं अपने उदाहरण से समझाती हूं। इसका असर तब होता हैं जब आप 13-14 साल के होने लगते हो।

   बात शुरू करते है घर से, मैं जब इस उम्र में थी, मैं यह नहीं कहती कि मैं अपने बड़ो की बात नहीं मानती थी। पर कभी कभार ऐसा होता था कि हमें किसी काम के लिए कहा जाए और उसे हम अनसुनी कर दें और यह सोचें,"कि क्या हर समय काम के लिए कहते रहते है कभी आराम से बैठने नहीं देते" उस समय हम अपने आप को बड़ा दयनीय समझते थे। तब हमने नहीं सोचा था कि हमारी यह काम को लेकर लापरवाही हमारे माता-पिता को कितनी बुरी लगती होगी। हमारा किसी बात पर पलट कर जवाब दे देना उन्हें कितना दुख पहुंचाता होगा।

     यह बात अब पता चलती है जब हमारे बच्चे कभी किसी काम को अनसुना करें या कभी हमें पलट कर जवाब दें तो दिल पर कैसे नश्तर चलते हैं।

     और जब कभी बाहर जाना हों किसी आटोरिक्शा से या दुकानदार से मोल-भाव करते हुए जब अभिभावक की आवाज तेज हो जाती थी तो हमें बहुत शर्म आती थी और हम अपने माता-पिता को ही चुप करवाते थे।

     पर यह बात अब पता चलती है कि जब उनके जगह हम और हमारी जगह हमारे बच्चे हमें धीरे बोलने की हिदायत देते है। और यह तो मेरे साथ कई बार हुआ और अब पता चला कि कैसा लगता है कि जब कोई किसी चीज के दुगने पैसे मांगें तो कितना गुस्सा आता है और आवाज (Automatically) तेज हो जाती है। क्योंकि पैसे की कदर अब पता चली है। 

   और अंत में, मैं यही कहना चाहूंगी कि अपने मां-बाप के किसी भी काम को अनसुना नहीं करना चाहिए और ना ही उनकी किसी बात पर शर्मिंदगी महसुस करनी चाहिए और पलट कर जवाब तो कभी भी नहीं देना चाहिए। क्योंकि जब आप इस उम्र में आओगे, और यहीं (same to same) अनुभव करोगे तब पता चलेगा कितना दुख होता हैं और अपने मां-बाप से क्षमा मांगते रह जाओगे। 

इसलिए मां-बाप की हमेशा इज्जत करनी चाहिए और जो आज आप करोगे, वही आपके पास लौटकर आऐगा। यह हमेशा याद  रखिएगा।

अंत मै आप सबका सहृदय धन्यवाद मेरा लेख पढ़ने के लिए। 

कमेंट जरूर करियेगा अगर पंसद आए या नहीं।

आप सबका स्वागत है मेरे ब्लॉग के कमेंट बॉक्स में।

     


Sunday, 31 March 2024

दिमाग और दिल के बीच की लड़ाई

 


नमस्कार साथियों

        आज के लेख में, मैं दिल और दिमाग की लड़ाई के बारे में लिख रही हूं। यह जो स्थिति है इसका सामना हर किसी को करना पडता है। फिर चाहे एक छोटी सी चीज लेनी हो या बङा निर्णय करना हो। यह दोनों आपस में बहुत भिङते है कभी दिल जीतता है, तो कभी दिमाग। 

       जैसा कि आप सब जानते है कि यह दोनों ही हमारे लिए  महत्वपूर्ण है। इन दोनों के द्वारा लिए गए निर्णयों से हमारा जीवन व शरीर चलता है।

     जहां दिल एक छोटे, जिद्दी और अल्हड बच्चे की तरह व्यवहार करता है, वहीं दिमाग एक बङे बुर्जुग समझदार की भुमिका निभाता है। 

       यहां यह बात भी सर्वमान्य है कि दिल के बजाय अगर दिमाग की बात मानी जाए तो वह अधिकतर सही होती है। क्योंकि दिल की मानी बात अधिकतर एक मीठी चाकलेट की तरह होती है जो बहुत अच्छी लगती है चाहे वो नुकसान दें।

       जबकि दिमाग की बात (हर बार नहीं) एक कङवी दवाई की तरह होती है जो आगे जाकर फायदेमंद ही होती हैं। इसके कई सारे उदाहरण है जहां दिमाग की बजाए दिल  की बात मानकर नुकसान उठाना पङता है। और यह हम सबके साथ कभी न कभी होता हैं।

       उदाहरण के लिए  रावण, कंस और द्रुयोधन जिनका दिमाग जानता था कि वह कितनी बङी गलती कर रहे है परन्तु अपनी दिल की मानकर उन्होंनें कितना नुकसान उठाया। यह तो पुरानी बातें है और सीख भी है कि हमेशा दिल सही नहीं होता बल्कि हर काम दिमाग से सोच-समझकर करना चाहिए। 

       अब आते है अपने ऊपर, आज भी ऐसा ही होता है हमारा दिमाग जानता है कि हम गलत कर रहे है पर अपने दिल की मानकर हम गलत कर ही देते हैं। जैसे कि आजकल हर कोई किसी न किसी बिमारी से जूझ रहा है, हजारो परहेज है पर हम सब अपने दिल की मानकर गलत कर ही लेते हैं। आज का युवा जल्दबाजी में आकर या जो दिल को भाता है वही करते है और फिर  पछताते है। ऐसा नहीं है कि हमारा दिमाग हमें आगाह नहीं करता वो बार-बार चेतावनी देता है।

     इसका भी समाधान है कि अगर हम कोई भी फैसला लेने से पहले 10 से 15 मिनट अच्छे से विचार कर लें तो सही तरीके से सोच-समझकर काम कर सकते हैं। क्योंकि फैसले आवेश में नहीं बल्कि दिमाग से लेने चाहिए। 

       अब अंत में, मैं आपसे जानना चाहूंगी कि आप कैसे फैसला लेते है। और क्या परेशानी face करते हैं कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताए। 


धन्यवाद 

       

      

Sunday, 3 March 2024

Bholenath

Watch this 


 https://youtube.com/shorts/SHyFU5behzY?si=Y_Lps4tNIZDRulM4

Sunday, 24 September 2023

परिवर्तनी एकादशी पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन क्या करें क्या न करें

 



परिवर्तनी एकादशी, हिन्दू पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु के समर्पण का एक विशेष दिन है जिसे व्रत और पूजा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है, और व्रती लोगों के पापों का क्षय होता है। इस धार्मिक पर्व के अवसर पर कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए:


क्या करें:


1. उपवास: परिवर्तनी एकादशी को उपवास करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसका अर्थ है कि आपको इस दिन बिना अनाज, अदरक, लहसुन, प्याज, और शाकाहारी आहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।


2. पूजा और आराधना: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना करें। विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना भी अच्छा विचार है।


3. दान और चारित्रिकता: इस दिन दान करना भी बहुत पुण्यकारी होता है। आप गरीबों को आहार, वस्त्र, और धन दे सकते हैं।


4. भगवद गीता का पाठ: भगवद गीता के ज्ञान को अपने जीवन में अपनाएं और उसके मार्गदर्शन के साथ जीवन जीने का प्रयास करें।


5. ध्यान और मेधा: मानसिक शांति के लिए ध्यान और मेधा अभ्यास करें, जिससे आप अपने मानसिक और आत्मिक विकास में सहायक हो सकते हैं।


क्या न करें:


1. अनाज और शाकाहारी आहारों का सेवन न करें, क्योंकि यह व्रत के उपास्य होते हैं।


2. मिथ्याचार: किसी भी प्रकार के झूठ बोलने और अधर्मिक कृत्यों से बचें।


3. राग द्वेष: इस दिन किसी के प्रति राग और द्वेष को त्यागें और सभी के प्रति समर्पण और स्नेह बनाए रखें।


4. अधर्मिक कार्य: इस दिन कोई भी अधर्मिक कार्य न करें और धार्मिक साधना का पालन करें।


5. अशुभ विचार: नकारात्मक विचारों को मन से दूर रखें और पॉजिटिविटी के साथ यह दिन बिताएं।


परिवर्तनी एकादशी को मनाने से विष्णु भगवान के आशीर्वाद का अद्वितीय अनुभव होता है और यह भक्तों के जीवन को सफलता, श

एशियन गेम्स 2023 :- भारत की झोली में पांच पदक, तीन रजत और दो कांस्य; हॉकी टीम की बड़ी जीत

 



एशियन गेम्स 2023 का आयोजन इंडोनेशिया के जकार्ता और पेलंबंग में हुआ, जो 18 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक चले। यह खेल एशियाई महाद्वीप के खिलाड़ियों के बीच महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है, जिसमें विभिन्न खेलों में दुनिया भर से आए खिलाड़ियां भाग लेते हैं। इस बार, भारतीय टीम ने एशियन गेम्स में काबिलियत का परिचय दिया और अपने प्रदर्शन से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।


भारतीय टीम के प्रमुख रंगभरी प्रदर्शन का हाइलाइट हॉकी टीम का रहा, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर सिकंदर बना दिया। हॉकी टीम ने फाइनल मैच में पाकिस्तान को हराया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले क्रिकेटर गौतम गम्भीर ने हॉकी टीम की सफलता को नेतृत्व किया।


इसके अलावा, भारतीय खिलाड़ियों ने अन्य खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन किया। तीन रजत पदक और दो कांस्य पदक भी जीतने का समर्थन किया और भारत के जीते गए पदकों की संख्या को बढ़ा दिया। यह वाकई भारतीय खेलों के लिए गर्व की बात है।


एशियन गेम्स 2023 में भारत के खिलाड़ियों की मेहनत, संघर्ष और प्रतिबद्धता को सराहना जाता है। ये पदक न केवल उनके प्रदर्शन का परिणाम हैं, बल्कि भारत के खिलाड़ियों की अगुआई में खेलने का सबूत हैं कि वे विश्व स्तर पर अपना नाम बना रहे हैं।


एशियन गेम्स 2023 का आयोजन महत्वपूर्ण खेल संघर्षों की एक दिलचस्प कड़ी थी और भारत के खिलाड़ियों ने उसे अपने जीवन की महत्वपूर्ण टिकटोक बना दिया। इन पदकों की जीत से भारतीय खेलों के प्रति रुझान बढ़ा है और हमें गर्व है कि हमारे खिलाड़ियों ने दुनिया के सामने अपनी शक्ति और साहस का प्रदर्शन किया।

बेटियों के प्रति समर्पण और प्यार का त्योहार - "बेटी दिवस"

 



      जब हम एक नई दुनिया में आते हैं, तो हमारे जीवन में एक छोटी सी परी आती है, जो हमारी धडकन और सपनों की राहत बन जाती है - हमारी बेटी। उनके आगमन का हर पल हमारे लिए खास होता है, और इस प्यार और समर्पण को मनाने के लिए हर साल हम "बेटी दिवस" मनाते हैं। यह त्योहार बेटियों के महत्व को साझा करने का मौका है और उनके साथी और परिवार के लोगों के द्वारा उनके समर्थन का प्रतीक है।


        बेटी दिवस का मतलब है बेटियों के साथ समर्पण का और उनके बचपन के साथ होने वाले प्यार का प्रमोट करना। इस दिन हम बेटियों को खुशियों की और साथी और परिवार के सभी सदस्यों के साथ वक्त बिताने का मौका देते हैं।


         बेटियाँ हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। वे शिक्षा, संवाद, और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। उनका संजीवन सा साथ हमें हमेशा समर्थन और प्यार देता है। बेटी दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी बेटियों के साथ उनके सपनों को पूरा करने का मौका देना चाहिए।


इस बेटी दिवस पर, हमें अपनी बेटियों के साथ समय बिताना चाहिए, उनके साथ उनके बचपन की कहानियों को सुनना चाहिए और उनके सपनों को साकार करने के लिए उन्हें प्रेरित करना चाहिए। हमें यह याद दिलाना चाहिए कि बेटियों का हर सपना महत्वपूर्ण होता है और हमें उनका समर्थन करना चाहिए।


इस बेटी दिवस पर, हमें बेटियों के साथ समर्पण और प्यार का त्योहार मनाना चाहिए, ताकि हमारे समाज में बेटियों को समर्थन और समानता मिले। यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि बेटियाँ हमारी गर्व की बात हैं और हमें उन्हें हमेशा समर्थन और प्यार देना चाहिए।

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